Sakal Jatiya Samaj SHIKSHA!

सकल जटिया समाज शिक्षा का महत्व

सबसे पहले हम आदि काल के बारे मे जाने जिसमें शिक्षा का अधिकार केवल ब्राह्मण ,क्षत्रिय एवं वैश्य तक ही सिमित था | शुद्रों को तो वैदिक ज्ञान सुनना भी अपराध माना जाता था | वेदों मे यह लिखा है कि शुद्रों के कानों में वेदों के श्लोक भी सुनाई नहीं देना चाहिये | यदि कोई शूद्र श्लोक सुन ले तो उसके कानों में सीसा डलवा दिया जावे | ताकि कोई भी वैदिक श्लोक सुन न सके | कालान्तर में परिवर्तन आता गया, सबसे पहले भक्ति काल में संत रविदासजी एवं कबीरदासजी ने अपने ज्ञान के बल पर शुद्रों को जागृत कर शिक्षा प्रदान की | इसके बाद शाहूजी महाराज एवं ज्योतिबा फुले ने शिक्षा का महत्व समझा और शुद्रों को शिक्षित किया | इसके बाद महामानव ,विश्व गुरु डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने भारत के संविधान में सम्पूर्ण मानव जाति के कल्याण हेतु अधिकार देकर शिक्षा के क्षेत्र में जो मार्ग प्रशस्त किया | वह सभी धर्म एवं मानव जाति के लिये अमृतपान के समान है| इन्ही अधिकार के कारण आज सम्पूर्ण भारत में अनेक व्यक्ति उच्च शिक्षा प्राप्त कर हर क्षेत्र में जैसे भारतीय प्रशासनिक सेवा, विदेश सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, यांत्रिकी सेवा, चिकित्सा सेवा, निजी क्षेत्र की सेवाओं में शिक्षा के बल पर अपनी सेवाऐं प्रदान कर रहे है| बाबा साहब अम्बेडकर ने अपनी शिक्षा के बल पर भारत का संविधान लिख दिया, जो चारों वेद, छः शास्त्र एवं अठारह पुराणों से भी ज्यादा शक्तिशाली है| जिसके दम पर भारत का लोकतंत्र टिका हुआ है| शिक्षा ही सभी समस्याओँ का समाधान है| इसलिये शिक्षा को अपना हथियार बनाईये |

बालचन्द वर्मा (मेर)
राष्ट्रीय अध्यक्ष
सकल जटिया समाज





आज के युग के अनिवार्य आवश्यकता है "शिक्षा "

शिक्षा के क्षेत्र में हमारा समाज आज से लगभग 100 वर्ष पूर्व नही के बराबर था | धीरे धीरे समाज के प्रबुद्धजनों ने शिक्षा के महत्व को समझा,लेकिन मजबुरी वश शिक्षा के क्षेत्र में अपना उचित स्थान नहीं बना पाये| आज से पचास वर्ष पूर्व से समाज में शिक्षा के क्षेत्र में जागृति आना प्रारंभ हुई| आजादी से पूर्व हम दलितों को छुआछूत का सामना करना पड़ता था | इसलिये स्कूलों में प्रवेश नहीं मिलता था| किसी बड़े शहर में प्रवेश मिल भी जाता तो अलग से बैठक व्यवस्था की जाती थी | सवर्ण शिक्षक दलितो की स्लेट एवं किताबों को हाथ तक नहीं लगाते थे | इसका उदाहरण मेरे पिताजी श्री काशीरामजी जौनवाल बताते थे कि उन्हे टाटपट्टी का एक टुकड़ा काटकर अलग से बैठाया जाता था इस स्थिति में उन्होने कक्षा चार तक ही पढ़ाई की | इसके बाद हम लोगों को पढ़ाया| समय काल में परिवर्तन आता गया स्थितियां बदलती गई | आजादी के बाद हम सबको संविधान के तहत शिक्षा का अधिकार मिला | हमारा समाज जो शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ था, समाज के कुछ जागरूक व्यक्तियों ने अपने बालक एवं बलिकाओं को शिक्षित करने का बिड़ा उठाया ,जिसके कारण वर्तमान में इंजीनियर ,डॉक्टर ,वकील ,तथा कई बड़े ओहदों पर समाज के व्यक्ति कार्यरत है | वर्तमान में पढ़ाई तो करवा ही रहे है, साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में भी भाग लेने के लिये प्रेरित कर रहे है | तथा आज अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में भी दाखिला दिलवा रहे है | तथा सबसे बड़ा शुभ संकेत यह कि समाज में बलिकाओं का शिक्षा स्तर बालकों से अच्छा है | पिछले वर्ष ग्राम डॉगड़ी की एक बालिका ने नीमच जिले में सर्वाधिक अंक अर्जित कर भोपाल में मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान प्राप्त किया | जिसके कारण समाज का गौरव बड़ा | इस प्रकार समाज में जागरूकता बढ़कर शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी होता जा रहा है| शिक्षा का विकास विगत पचास वर्षो की कड़ी मेहनत का परिणाम है| आज हम अन्य समाजों की तुलना में कहीं से भी कम नहीं आंके जा सकते है|

कन्हैयालाल जौनवाल
राष्ट्रीय महासचिव
सकल जटिया समाज